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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 11

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

सर्वद्वारेषु देहेऽस्मिन्प्रकाश उपजायते | ज्ञानं यदा तदा विद्याद्विवृद्धं सत्त्वमित्युत

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारों-(इन्द्रियों और अन्तःकरण-) में प्रकाश (स्वच्छता) और ज्ञान (विवेक) प्रकट हो जाता है, तब जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जब इस मनुष्यशरीरमें सब द्वारों-(इन्द्रियों और अन्तःकरण-) में प्रकाश (स्वच्छता) और ज्ञान (विवेक) प्रकट हो जाता है, तब जानना चाहिये कि सत्त्वगुण बढ़ा हुआ है।

English Meaning

When through every gate (sense) in this body, the wisdom-light shines, then it may be known that Sattva is predominant.

When through every gate (sense) in this body, the wisdom-light shines, then it may be known that Sattva is predominant.

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