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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 12

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

लोभः प्रवृत्तिरारम्भः कर्मणामशमः स्पृहा | रजस्येतानि जायन्ते विवृद्धे भरतर्षभ

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशमें श्रेष्ठ अर्जुन ! रजोगुणके बढ़नेपर लोभ, प्रवृत्ति, कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और स्पृहा -- ये वृत्तियाँ पैदा होती हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशमें श्रेष्ठ अर्जुन ! रजोगुणके बढ़नेपर लोभ, प्रवृत्ति, कर्मोंका आरम्भ, अशान्ति और स्पृहा -- ये वृत्तियाँ पैदा होती हैं।

English Meaning

Greed, activity, the undertaking of actions, restlessness, longing these arise when Rajas is predominant, O Arjuna.

Greed, activity, the undertaking of actions, restlessness, longing these arise when Rajas is predominant, O Arjuna.

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