ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 13

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

अप्रकाशोऽप्रवृत्तिश्च प्रमादो मोह एव च | तमस्येतानि जायन्ते विवृद्धे कुरुनन्दन

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे कुरुनन्दन ! तमोगुणके बढ़नेपर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह -- ये वृत्तियाँ भी पैदा होती हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे कुरुनन्दन ! तमोगुणके बढ़नेपर अप्रकाश, अप्रवृत्ति, प्रमाद और मोह -- ये वृत्तियाँ भी पैदा होती हैं।

English Meaning

Darkness, inertness, heedlessness and delusion these arise when Tamas is predominant, O Arjuna.

Darkness, inertness, heedlessness and delusion these arise when Tamas is predominant, O Arjuna.

आगे पढ़ें — गुणत्रय विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता