ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 14

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् | तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिस समय सत्त्वगुण बढ़ा हो, उस समय यदि देहधारी मनुष्य मर जाता है, तो वह,उत्तमवेत्ताओंके निर्मल लोकोंमें जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिस समय सत्त्वगुण बढ़ा हो, उस समय यदि देहधारी मनुष्य मर जाता है, तो वह,उत्तमवेत्ताओंके निर्मल लोकोंमें जाता है।

English Meaning

If the embodied one meets with death when Sattva is predominant, then he attains to the spotless worlds of the knowers of the Highest.

If the embodied one meets with death when Sattva is predominant, then he attains to the spotless worlds of the knowers of the Highest.

आगे पढ़ें — गुणत्रय विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता