ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 15

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

रजसि प्रलयं गत्वा कर्मसङ्गिषु जायते | तथा प्रलीनस्तमसि मूढयोनिषु जायते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

रजोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला प्राणी मनुष्ययोनिमें जन्म लेता है तथा तमोगुणके बढ़नेपर मरनेवाला मूढ़योनियोंमें जन्म लेता है।

English Meaning

Meeting death in Rajas, he is born among those who are attached to action; and dying in Tamas, he is born in the womb of the senseless.

Meeting death in Rajas, he is born among those who are attached to action; and dying in Tamas, he is born in the womb of the senseless.

आगे पढ़ें — गुणत्रय विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता