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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 16

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

कर्मणः सुकृतस्याहुः सात्त्विकं निर्मलं फलम् | रजसस्तु फलं दुःखमज्ञानं तमसः फलम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

(विवेकी पुरुषोंने) शुभ-कर्मका तो सात्त्विक निर्मल फल कहा है, राजस कर्मका फल दुःख कहा है और तामस कर्मका फल अज्ञान (मूढ़ता) कहा है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

(विवेकी पुरुषोंने) शुभ-कर्मका तो सात्त्विक निर्मल फल कहा है, राजस कर्मका फल दुःख कहा है और तामस कर्मका फल अज्ञान (मूढ़ता) कहा है।

English Meaning

The fruit of good action, they say, is Sattvic and pure, verily the fruit of Rajas is pain, and ignorance is the fruit of Tamas.

The fruit of good action, they say, is Sattvic and pure, verily the fruit of Rajas is pain, and ignorance is the fruit of Tamas.

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