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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 19

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

नान्यं गुणेभ्यः कर्तारं यदा द्रष्टानुपश्यति | गुणेभ्यश्च परं वेत्ति मद्भावं सोऽधिगच्छति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जब विवेकी (विचारकुशल) मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मेरे स्वरूपको प्राप्त हो जाता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जब विवेकी (विचारकुशल) मनुष्य तीनों गुणोंके सिवाय अन्य किसीको कर्ता नहीं देखता और अपनेको गुणोंसे पर अनुभव करता है, तब वह मेरे स्वरूपको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

When the seer beholds no agent other than the Gunas and knows That which is higher than they, he attains to My Being.

When the seer beholds no agent other than the Gunas and knows That which is higher than they, he attains to My Being.

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