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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 21

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

अर्जुन उवाच | कैर्लिंगैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो | किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अर्जुन बोले -- हे प्रभो ! इन तीनों गुणोंसे अतीत हुआ मनुष्य किन लक्षणोंसे युक्त होता है? उसके आचरण कैसे होते हैं? और इन तीनों गुणोंका अतिक्रमण कैसे किया जा सकता है?

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अर्जुन बोले -- हे प्रभो ! इन तीनों गुणोंसे अतीत हुआ मनुष्य किन लक्षणोंसे युक्त होता है? उसके आचरण कैसे होते हैं? और इन तीनों गुणोंका अतिक्रमण कैसे किया जा सकता है?

English Meaning

Arjuna said What are the marks of him who has transcended the three qualities, O Lord? What is his conduct and how does he go beyond these three qualities?

Arjuna said What are the marks of him who has transcended the three qualities, O Lord? What is his conduct and how does he go beyond these three qualities?

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