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श्रीमद्भगवद्गीता · गुणत्रय विभाग योग

श्लोक 22

गुणत्रय विभाग योग · Gunatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | प्रकाशं च प्रवृत्तिं च मोहमेव च पाण्डव | न द्वेष्टि सम्प्रवृत्तानि न निवृत्तानि काङ्क्षति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- हे पाण्डव ! प्रकाश, प्रवृत्ति तथा मोह -- ये सभी अच्छी तरहसे प्रवृत्त हो जायँ तो भी गुणातीत मनुष्य इनसे द्वेष नहीं करता, और ये सभी निवृत्त हो जायँ तो इनकी इच्छा नहीं करता।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- हे पाण्डव ! प्रकाश, प्रवृत्ति तथा मोह -- ये सभी अच्छी तरहसे प्रवृत्त हो जायँ तो भी गुणातीत मनुष्य इनसे द्वेष नहीं करता, और ये सभी निवृत्त हो जायँ तो इनकी इच्छा नहीं करता।

English Meaning

The Blessed Lord said When light, activity and delusion are present, he hates them not, nor does he long for them when they are absent.

The Blessed Lord said When light, activity and delusion are present, he hates them not, nor does he long for them when they are absent.

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