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श्रीमद्भगवद्गीता · पुरुषोत्तम योग

श्लोक 13

पुरुषोत्तम योग · Purushottama Yoga

मूल पाठ

गामाविश्य च भूतानि धारयाम्यहमोजसा | पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं ही पृथ्वीमें प्रविष्ट होकर अपनी शक्तिसे समस्त प्राणियोंको धारण करता हूँ; और मैं ही रसमय चन्द्रमाके रूपमें समस्त ओषधियों-(वनस्पतियों-) को पुष्ट करता हूँ।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मैं ही पृथ्वीमें प्रविष्ट होकर अपनी शक्तिसे समस्त प्राणियोंको धारण करता हूँ; और मैं ही रसमय चन्द्रमाके रूपमें समस्त ओषधियों-(वनस्पतियों-) को पुष्ट करता हूँ।

English Meaning

Permeating the earth I support all beings by (My) energy; and having become the watery moon I nourish all herbs.

Permeating the earth I support all beings by (My) energy; and having become the watery moon I nourish all herbs.

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