ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · पुरुषोत्तम योग

श्लोक 14

पुरुषोत्तम योग · Purushottama Yoga

मूल पाठ

अहं वैश्वानरो भूत्वा प्राणिनां देहमाश्रितः | प्राणापानसमायुक्तः पचाम्यन्नं चतुर्विधम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्राणियोंके शरीरमें रहनेवाला मैं प्राण-अपानसे युक्त वैश्वानर होकर चार प्रकारके अन्नको पचाता हूँ।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

प्राणियोंके शरीरमें रहनेवाला मैं प्राण-अपानसे युक्त वैश्वानर होकर चार प्रकारके अन्नको पचाता हूँ।

English Meaning

Having become the fire Vaisvanara, I abide in the body of living beings and, associated with the Prana and the Apana, digest the fourfold food.

Having become the fire Vaisvanara, I abide in the body of living beings and, associated with the Prana and the Apana, digest the fourfold food.

आगे पढ़ें — पुरुषोत्तम योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता