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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 14

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् | ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

देवता, ब्राह्मण, गुरुजन और जीवन्मुक्त महापुरुषका पूजन करना, शुद्धि रखना, सरलता, ब्रह्मचर्यका पालन करना और हिंसा न करना -- यह शरीरसम्बन्धी तप कहा जाता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

देवता, ब्राह्मण, गुरुजन और जीवन्मुक्त महापुरुषका पूजन करना, शुद्धि रखना, सरलता, ब्रह्मचर्यका पालन करना और हिंसा न करना -- यह शरीरसम्बन्धी तप कहा जाता है।

English Meaning

Worship of the gods, the twice-born, the teachers and the wise, purity, straightforwardness, celibacy and non-injury are called the austerities of the body.

Worship of the gods, the twice-born, the teachers and the wise, purity, straightforwardness, celibacy and non-injury are called the austerities of the body.

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