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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 3

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

सत्त्वानुरूपा सर्वस्य श्रद्धा भवति भारत | श्रद्धामयोऽयं पुरुषो यो यच्छ्रद्धः स एव सः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भारत ! सभी मनुष्योंकी श्रद्धा अन्तःकरणके अनुरूप होती है। यह मनुष्य श्रद्धामय है। इसलिये जो जैसी श्रद्धावाला है, वही उसका स्वरूप है अर्थात् वही उसकी निष्ठा -- स्थिति है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भारत ! सभी मनुष्योंकी श्रद्धा अन्तःकरणके अनुरूप होती है। यह मनुष्य श्रद्धामय है। इसलिये जो जैसी श्रद्धावाला है, वही उसका स्वरूप है अर्थात् वही उसकी निष्ठा -- स्थिति है।

English Meaning

The faith of each is in accordance with his nature, O Arjuna. The man consists of his faith; as a man's faith is, so is he.

The faith of each is in accordance with his nature, O Arjuna. The man consists of his faith; as a man's faith is, so is he.

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