ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 7

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः | यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं श्रृणु

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आहार भी सबको तीन प्रकारका प्रिय होता है और वैसे ही यज्ञ, दान और तप भी तीन प्रकारके होते हैं अर्थात् शास्त्रीय कर्मोंमें भी तीन प्रकारकी रुचि होती है, तू उनके इस भेदको सुन।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

आहार भी सबको तीन प्रकारका प्रिय होता है और वैसे ही यज्ञ, दान और तप भी तीन प्रकारके होते हैं अर्थात् शास्त्रीय कर्मोंमें भी तीन प्रकारकी रुचि होती है, तू उनके इस भेदको सुन।

English Meaning

The food also which is dear to each is threefold, as also sacrifice, austerity and almsgiving. Hear thou the distinction of these.

The food also which is dear to each is threefold, as also sacrifice, austerity and almsgiving. Hear thou the distinction of these.

आगे पढ़ें — श्रद्धात्रय विभाग योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता