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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 8

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः | रस्याः स्निग्धाः स्थिरा हृद्या आहाराः सात्त्विकप्रियाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

आयु, सत्त्वगुण, बल, आरोग्य, सुख और प्रसन्नता बढ़ानेवाले, स्थिर रहनेवाले, हृदयको शक्ति देनेवाले, रसयुक्त तथा चिकने -- ऐसे आहार अर्थात् भोजन करनेके पदार्थ सात्त्विक मनुष्यको प्रिय होते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

आयु, सत्त्वगुण, बल, आरोग्य, सुख और प्रसन्नता बढ़ानेवाले, स्थिर रहनेवाले, हृदयको शक्ति देनेवाले, रसयुक्त तथा चिकने -- ऐसे आहार अर्थात् भोजन करनेके पदार्थ सात्त्विक मनुष्यको प्रिय होते हैं।

English Meaning

The foods which increase life, purity, strength, health, joy and cheerfulness (good appetite), which are savoury and oleaginous, substantial and agreeable, are dear to the Sattvic (pure) people.

The foods which increase life, purity, strength, health, joy and cheerfulness (good appetite), which are savoury and oleaginous, substantial and agreeable, are dear to the Sattvic (pure) people.

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