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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 9

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः | आहारा राजसस्येष्टा दुःखशोकामयप्रदाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अति कड़वे, अति खट्टे, अति नमकीन, अति गरम, अति तीखे, अति रूखे और अति दाहकारक आहार अर्थात् भोजनके पदार्थ राजस मनुष्यको प्रिय होते हैं, जो कि दुःख, शोक और रोगोंको देनेवाले हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अति कड़वे, अति खट्टे, अति नमकीन, अति गरम, अति तीखे, अति रूखे और अति दाहकारक आहार अर्थात् भोजनके पदार्थ राजस मनुष्यको प्रिय होते हैं, जो कि दुःख, शोक और रोगोंको देनेवाले हैं।

English Meaning

The foods that are bitter, sour, saline, excessively hot, pungent, dry and burning, are liked by the Rajasic and are productive of pain, grief and disease.

The foods that are bitter, sour, saline, excessively hot, pungent, dry and burning, are liked by the Rajasic and are productive of pain, grief and disease.

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