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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 10

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् | उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो भोजन अधपका, रसरहित, दुर्गन्धित, बासी और उच्छिष्ट है तथा जो महान् अपवित्र भी है, वह तामस मनुष्यको प्रिय होता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो भोजन अधपका, रसरहित, दुर्गन्धित, बासी और उच्छिष्ट है तथा जो महान् अपवित्र भी है, वह तामस मनुष्यको प्रिय होता है।

English Meaning

That which is state, tasteless, putrid, rotten, refuse and impure, is the food liked by the Tamasic.

That which is state, tasteless, putrid, rotten, refuse and impure, is the food liked by the Tamasic.

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