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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 11

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

अफलाकाङ्क्षिभिर्यज्ञो विधिदृष्टो य इज्यते | यष्टव्यमेवेति मनः समाधाय स सात्त्विकः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

यज्ञ करना कर्तव्य है -- इस तरह मनको समाधान करके फलेच्छारहित मनुष्योंद्वारा जो शास्त्रविधिसे नियत यज्ञ किया जाता है, वह सात्त्विक है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

यज्ञ करना कर्तव्य है -- इस तरह मनको समाधान करके फलेच्छारहित मनुष्योंद्वारा जो शास्त्रविधिसे नियत यज्ञ किया जाता है, वह सात्त्विक है।

English Meaning

That sacrifice which is offered by men without desire for reward as enjoined by the ordinance (scripture), with a firm faith that to do so is a duty, is Sattvic or pure.

That sacrifice which is offered by men without desire for reward as enjoined by the ordinance (scripture), with a firm faith that to do so is a duty, is Sattvic or pure.

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