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श्रीमद्भगवद्गीता · श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक 2

श्रद्धात्रय विभाग योग · Shraddhatraya Vibhaga Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा | सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां श्रृणु

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- मनुष्योंकी वह स्वभावसे उत्पन्न हुई श्रद्धा सात्त्विकी तथा राजसी और तामसी -- ऐसे तीन तरहकी ही होती है, उसको तुम मेरेसे सुनो।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- मनुष्योंकी वह स्वभावसे उत्पन्न हुई श्रद्धा सात्त्विकी तथा राजसी और तामसी -- ऐसे तीन तरहकी ही होती है, उसको तुम मेरेसे सुनो।

English Meaning

The Blessed Lord said Threefold is the faith of the embodied, which is inherent in their nature the Sattvic (pure), the Rajasic (passionate) and the Tamasic (dark). Do thou hear of it.

The Blessed Lord said Threefold is the faith of the embodied, which is inherent in their nature the Sattvic (pure), the Rajasic (passionate) and the Tamasic (dark). Do thou hear of it.

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