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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 2

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

श्री भगवानुवाच | काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः | सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- कई विद्वान् काम्यकर्मोंके त्यागको संन्यास कहते हैं और कई विद्वान् सम्पूर्ण कर्मोंके फलके त्यागको त्याग कहते हैं। कई विद्वान् कहते हैं कि कर्मोंको दोषकी तरह छोड़ देना चाहिये और कई विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ? दान और तपरूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- कई विद्वान् काम्यकर्मोंके त्यागको संन्यास कहते हैं और कई विद्वान् सम्पूर्ण कर्मोंके फलके त्यागको त्याग कहते हैं। कई विद्वान् कहते हैं कि कर्मोंको दोषकी तरह छोड़ देना चाहिये और कई विद्वान् कहते हैं कि यज्ञ? दान और तपरूप कर्मोंका त्याग नहीं करना चाहिये।

English Meaning

The Blessed Lord said The sages understand Sannyasa to be the renunciation of action with desire; the wise declare the abandonment of the fruits of all actions as Tyaga.

The Blessed Lord said The sages understand Sannyasa to be the renunciation of action with desire; the wise declare the abandonment of the fruits of all actions as Tyaga.

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