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श्रीमद्भगवद्गीता · मोक्ष संन्यास योग

श्लोक 4

मोक्ष संन्यास योग · Moksha Sanyasa Yoga

मूल पाठ

निश्चयं श्रृणु मे तत्र त्यागे भरतसत्तम | त्यागो हि पुरुषव्याघ्र त्रिविधः संप्रकीर्तितः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन ! तू संन्यास और त्याग -- इन दोनोंमेंसे पहले त्यागके विषयमें मेरा निश्चय सुन; क्योंकि हे पुरुषश्रेष्ठ ! त्याग तीन प्रकारका कहा गया है।

English Meaning

Hear from Me the conclusion or the final truth about this abandonment, O best of the Bharatas; abandonment, verily, O best of men, has been declared to be of three kinds.

Hear from Me the conclusion or the final truth about this abandonment, O best of the Bharatas; abandonment, verily, O best of men, has been declared to be of three kinds.

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