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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 19

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर | असक्तो ह्याचरन्कर्म परमाप्नोति पूरुषः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

इसलिये तू निरन्तर आसक्तिरहित होकर कर्तव्य-कर्मका भलीभाँति आचरण कर; क्योंकि आसक्तिरहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्माको प्राप्त हो जाता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

इसलिये तू निरन्तर आसक्तिरहित होकर कर्तव्य-कर्मका भलीभाँति आचरण कर; क्योंकि आसक्तिरहित होकर कर्म करता हुआ मनुष्य परमात्माको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

Therefore without attachment, do thou always perform action which should be done; for by performing action without attachment man reaches the Supreme.

Therefore without attachment, do thou always perform action which should be done; for by performing action without attachment man reaches the Supreme.

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