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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 21

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः | स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण देता है, दूसरे मनुष्य उसीके अनुसार आचरण करते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रेष्ठ मनुष्य जो-जो आचरण करता है, दूसरे मनुष्य वैसा-वैसा ही आचरण करते हैं। वह जो कुछ प्रमाण देता है, दूसरे मनुष्य उसीके अनुसार आचरण करते हैं।

English Meaning

Whatsoever a great man does, that the other men also do; whatever he sets up as the standard, that the world (mankind) follows.

Whatsoever a great man does, that the other men also do; whatever he sets up as the standard, that the world (mankind) follows.

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