ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 37

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

श्रीभगवानुवाच | काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः | महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले - रजोगुणसे उत्पन्न हुआ यह काम ही क्रोध है। यह बहुत खानेवाला और महापापी है। इस विषयमें तू इसको ही वैरी जान।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले - रजोगुणसे उत्पन्न हुआ यह काम ही क्रोध है। यह बहुत खानेवाला और महापापी है। इस विषयमें तू इसको ही वैरी जान।

English Meaning

The Blessed Lord said It is desire, it is anger both of the ality of Rajas, all-devouring, all-sinful; know this as the foe here (in this world).

The Blessed Lord said It is desire, it is anger both of the ality of Rajas, all-devouring, all-sinful; know this as the foe here (in this world).

आगे पढ़ें — कर्म योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता