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श्रीमद्भगवद्गीता · कर्म योग

श्लोक 8

कर्म योग · Karma Yoga

मूल पाठ

नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः | शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्य-कर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

तू शास्त्रविधिसे नियत किये हुए कर्तव्य-कर्म कर; क्योंकि कर्म न करनेकी अपेक्षा कर्म करना श्रेष्ठ है तथा कर्म न करनेसे तेरा शरीर-निर्वाह भी सिद्ध नहीं होगा।

English Meaning

Do thou perform (thy) bounden duty, for action is superior to inaction and even the maintenance of the body would not be possible for thee by inaction.

Do thou perform (thy) bounden duty, for action is superior to inaction and even the maintenance of the body would not be possible for thee by inaction.

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