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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 17

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

कर्मणो ह्यपि बोद्धव्यं बोद्धव्यं च विकर्मणः | अकर्मणश्च बोद्धव्यं गहना कर्मणो गतिः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

कर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये और अकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये तथा विकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये; क्योंकि कर्मकी गति गहन है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

कर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये और अकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये तथा विकर्मका तत्त्व भी जानना चाहिये; क्योंकि कर्मकी गति गहन है।

English Meaning

For verily (the true nature) of action (enjoined by the scriptures) should be known, also (that) of forbidden (or unlawful) action, and of inaction; hard to understand is the nature (path) of action.

For verily (the true nature) of action (enjoined by the scriptures) should be known, also (that) of forbidden (or unlawful) action, and of inaction; hard to understand is the nature (path) of action.

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