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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 18

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः | स बुद्धिमान् मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो मनुष्य कर्ममें अकर्म देखता है और जो अकर्ममें कर्म देखता है, वह मनुष्योंमें बुद्धिमान् है, योगी है और सम्पूर्ण कर्मोंको करनेवाला है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो मनुष्य कर्ममें अकर्म देखता है और जो अकर्ममें कर्म देखता है, वह मनुष्योंमें बुद्धिमान् है, योगी है और सम्पूर्ण कर्मोंको करनेवाला है।

English Meaning

He who seeth inaction in action and action in inaction, he is wise among men; he is a Yogi and performer of all actions.

He who seeth inaction in action and action in inaction, he is wise among men; he is a Yogi and performer of all actions.

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