ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 25

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते | ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अन्य योगीलोग भगवदर्पणरूप यज्ञका ही अनुष्ठान करते हैं और दूसरे योगीलोग ब्रह्मरूप अग्निमें विचाररूप यज्ञके द्वारा ही जीवात्मारूप यज्ञका हवन करते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अन्य योगीलोग भगवदर्पणरूप यज्ञका ही अनुष्ठान करते हैं और दूसरे योगीलोग ब्रह्मरूप अग्निमें विचाररूप यज्ञके द्वारा ही जीवात्मारूप यज्ञका हवन करते हैं।

English Meaning

Some Yogies perform sacrifice to the gods alone; while others (who have realised the Self) offer the self as sacrifice by the Self in the fire of Brahman alone.

Some Yogies perform sacrifice to the gods alone; while others (who have realised the Self) offer the self as sacrifice by the Self in the fire of Brahman alone.

आगे पढ़ें — ज्ञान कर्म संन्यास योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता