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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 26

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

श्रोत्रादीनीन्द्रियाण्यन्ये संयमाग्निषु जुह्वति | शब्दादीन्विषयानन्य इन्द्रियाग्निषु जुह्वति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अन्य योगीलोग श्रोत्रादि समस्त इन्द्रियोंका संयमरूप अग्नियोंमें हवन किया करते हैं और दूसरे योगीलोग शब्दादि विषयोंका इन्द्रियरूप अग्नियोंमें हवन किया करते हैं।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अन्य योगीलोग श्रोत्रादि समस्त इन्द्रियोंका संयमरूप अग्नियोंमें हवन किया करते हैं और दूसरे योगीलोग शब्दादि विषयोंका इन्द्रियरूप अग्नियोंमें हवन किया करते हैं।

English Meaning

Some again offer the organ of hearing and other senses as sacrifice in the fire of restraint; others offer sound and other objects of the senses as sacrifice in the fire of the senses.

Some again offer the organ of hearing and other senses as sacrifice in the fire of restraint; others offer sound and other objects of the senses as sacrifice in the fire of the senses.

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