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श्रीमद्भगवद्गीता · ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक 27

ज्ञान कर्म संन्यास योग · Jnana Karma Sanyasa Yoga

मूल पाठ

सर्वाणीन्द्रियकर्माणि प्राणकर्माणि चापरे | आत्मसंयमयोगाग्नौ जुह्वति ज्ञानदीपिते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

अन्य योगीलोग सम्पूर्ण इन्द्रियोंकी क्रियाओंको और प्राणोंकी क्रियाओंको ज्ञानसे प्रकाशित आत्मसंयमयोगरूप अग्निमें हवन किया करते हैं।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

अन्य योगीलोग सम्पूर्ण इन्द्रियोंकी क्रियाओंको और प्राणोंकी क्रियाओंको ज्ञानसे प्रकाशित आत्मसंयमयोगरूप अग्निमें हवन किया करते हैं।

English Meaning

Others again sacrifice all the functions of the senses and those of the breath (vital energy or Prana) in the fire of the Yoga of self-restraint kindled by knowledge.

Others again sacrifice all the functions of the senses and those of the breath (vital energy or Prana) in the fire of the Yoga of self-restraint kindled by knowledge.

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