ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 13

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः | संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

काया, शिर और ग्रीवाको सीधे अचल धारण करके तथा दिशाओंको न देखकर केवल अपनी नासिकाके अग्रभागको देखते हुए स्थिर होकर बैठे।

English Meaning

Let him firmly hold his body, head and neck erect and still, gazing at the tip of his nose, without looking around.

Let him firmly hold his body, head and neck erect and still, gazing at the tip of his nose, without looking around.

आगे पढ़ें — आत्म संयम योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता