ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 19

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता | योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जैसे स्पन्दनरहित वायुके स्थानमें स्थित दीपककी लौ चेष्टारहित हो जाती है, योगका अभ्यास करते हुए वश में किए हुए चित्तवाले योगीके चित्तकी वैसी ही उपमा कही गयी है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जैसे स्पन्दनरहित वायुके स्थानमें स्थित दीपककी लौ चेष्टारहित हो जाती है, योगका अभ्यास करते हुए वश में किए हुए चित्तवाले योगीके चित्तकी वैसी ही उपमा कही गयी है।

English Meaning

As a lamp placed in a windless spot does not flicker; to such is compared the Yogi of controlled mind, practising Yoga in the Self (or absorbed in the Yoga of the Self).

As a lamp placed in a windless spot does not flicker; to such is compared the Yogi of controlled mind, practising Yoga in the Self (or absorbed in the Yoga of the Self).

आगे पढ़ें — आत्म संयम योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता