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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 25

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

शनैः शनैरुपरमेद् बुद्ध्या धृतिगृहीतया | आत्मसंस्थं मनः कृत्वा न किञ्चिदपि चिन्तयेत्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

धैर्ययुक्त बुद्धिके द्वारा संसारसे धीरे-धीरे उपराम हो जाय और परमात्मस्वरूपमें मन-(बुद्धि-) को सम्यक् प्रकारसे स्थापन करके फिर कुछ भी चिन्तन न करे।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

धैर्ययुक्त बुद्धिके द्वारा संसारसे धीरे-धीरे उपराम हो जाय और परमात्मस्वरूपमें मन-(बुद्धि-) को सम्यक् प्रकारसे स्थापन करके फिर कुछ भी चिन्तन न करे।

English Meaning

Little by little let him attain to ietude by the intellect held firmly; having made the mind establish itself in the Self, let him not think of anything.

Little by little let him attain to ietude by the intellect held firmly; having made the mind establish itself in the Self, let him not think of anything.

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