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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 27

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम् | उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जिसके सब पाप नष्ट हो गये हैं, जिसका रजोगुण तथा मन सर्वथा शान्त(निर्मल) हो गया है, ऐसे इस ब्रह्मस्वरूप योगीको निश्चित ही उत्तम (सात्त्विक) सुख प्राप्त होता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जिसके सब पाप नष्ट हो गये हैं, जिसका रजोगुण तथा मन सर्वथा शान्त(निर्मल) हो गया है, ऐसे इस ब्रह्मस्वरूप योगीको निश्चित ही उत्तम (सात्त्विक) सुख प्राप्त होता है।

English Meaning

Supreme Bliss verily comes to this Yogi whose mind is ite peaceful, whose passion is ieted, who has become Brahman and who is free from sin.

Supreme Bliss verily comes to this Yogi whose mind is ite peaceful, whose passion is ieted, who has become Brahman and who is free from sin.

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