ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 30

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

यो मां पश्यति सर्वत्र सर्वं च मयि पश्यति | तस्याहं न प्रणश्यामि स च मे न प्रणश्यति

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

जो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

जो सबमें मुझे देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिये मैं अदृश्य नहीं होता और वह मेरे लिये अदृश्य नहीं होता।

English Meaning

He who sees Me everywhere and sees everything in Me, he never becomes separated from Me, nor do I become separated from him.

He who sees Me everywhere and sees everything in Me, he never becomes separated from Me, nor do I become separated from him.

आगे पढ़ें — आत्म संयम योग के सभी श्लोक · श्रीमद्भगवद्गीता