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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 35

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

श्रीभगवानुवाच | असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलं | अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

श्रीभगवान् बोले -- हे महाबाहो! यह मन बड़ा चञ्चल है और इसका निग्रह करना भी बड़ा कठिन है -- यह तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है। परन्तु हे कुन्तीनन्दन! अभ्यास और वैराग्यके द्वारा इसका निग्रह किया जाता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

श्रीभगवान् बोले -- हे महाबाहो! यह मन बड़ा चञ्चल है और इसका निग्रह करना भी बड़ा कठिन है -- यह तुम्हारा कहना बिलकुल ठीक है। परन्तु हे कुन्तीनन्दन! अभ्यास और वैराग्यके द्वारा इसका निग्रह किया जाता है।

English Meaning

The Blessed Lord said Undoubtedly, O mighty-armed Arjuna, the mind is difficult to control and restless; but by practice and by dispassion it may be restrained.

The Blessed Lord said Undoubtedly, O mighty-armed Arjuna, the mind is difficult to control and restless; but by practice and by dispassion it may be restrained.

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