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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 45

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः | अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

परन्तु जो योगी प्रयत्नपूर्वक यत्न करता है और जिसके पाप नष्ट हो गये हैं तथा जो अनेक जन्मोंसे सिद्ध हुआ है, वह योगी फिर परमगतिको प्राप्त हो जाता है।

English Meaning

But the Yogi who strives with assiduity, purified of sins and perfected gradually through many births, reaches the highest goal.

But the Yogi who strives with assiduity, purified of sins and perfected gradually through many births, reaches the highest goal.

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