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श्रीमद्भगवद्गीता · आत्म संयम योग

श्लोक 47

आत्म संयम योग · Atma Samyama Yoga

मूल पाठ

योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना | श्रद्धावान्भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

सम्पूर्ण योगियोंमें भी जो श्रद्धावान् भक्त मुझमें तल्लीन हुए मनसे मेरा भजन करता है, वह मेरे मतमें सर्वश्रेष्ठ योगी है।

English Meaning

And among all the Yogis he who, full of faith and with his inner self merged in Me, worships Me is deemed by Me to be the most devout.

And among all the Yogis he who, full of faith and with his inner self merged in Me, worships Me is deemed by Me to be the most devout.

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