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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 15

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् | नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

महात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते; क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं अर्थात् उनको परम प्रेमकी प्राप्ति हो गयी है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

महात्मालोग मुझे प्राप्त करके दुःखालय और अशाश्वत पुनर्जन्मको प्राप्त नहीं होते; क्योंकि वे परमसिद्धिको प्राप्त हो गये हैं अर्थात् उनको परम प्रेमकी प्राप्ति हो गयी है।

English Meaning

Having attained Me these great souls do not again take birth (here) which is the place of pain and is non-eternal: they have reached the highest perfection (liberation).

Having attained Me these great souls do not again take birth (here) which is the place of pain and is non-eternal: they have reached the highest perfection (liberation).

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