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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 16

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन | मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे अर्जुन ! ब्रह्मलोकतक सभी लोक पुनरावर्ती है; परन्तु हे कौन्तेय ! मुझे प्राप्त होनेपर पुनर्जन्म नहीं होता।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे अर्जुन ! ब्रह्मलोकतक सभी लोक पुनरावर्ती है; परन्तु हे कौन्तेय ! मुझे प्राप्त होनेपर पुनर्जन्म नहीं होता।

English Meaning

(All) the worlds including the world of Brahma are subject to return again, O Arjuna; but he who reaches Me, O son of Kunti, has no rirth.

(All) the worlds including the world of Brahma are subject to return again, O Arjuna; but he who reaches Me, O son of Kunti, has no rirth.

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