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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 26

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

शुक्लकृष्णे गती ह्येते जगतः शाश्वते मते | एकया यात्यनावृत्तिमन्ययाऽऽवर्तते पुनः

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

क्योंकि शुक्ल और कृष्ण -- ये दोनों गतियाँ अनादिकालसे जगत्-(प्राणिमात्र-) के साथ सम्बन्ध रखनेवाली मानी गई हैं। इनमेंसे एक गतिमें जानेवालेको लौटना नहीं पड़ता और दूसरी गतिमें जानेवालेको लौटना पड़ता है।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

क्योंकि शुक्ल और कृष्ण -- ये दोनों गतियाँ अनादिकालसे जगत्-(प्राणिमात्र-) के साथ सम्बन्ध रखनेवाली मानी गई हैं। इनमेंसे एक गतिमें जानेवालेको लौटना नहीं पड़ता और दूसरी गतिमें जानेवालेको लौटना पड़ता है।

English Meaning

The bright and the dark paths of the world are verily thought to be eternal; by the one (the bright path) a man goes not to return and by the other (the dark path) he returns.

The bright and the dark paths of the world are verily thought to be eternal; by the one (the bright path) a man goes not to return and by the other (the dark path) he returns.

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