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श्रीमद्भगवद्गीता · अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक 27

अक्षर ब्रह्म योग · Akshara Brahma Yoga

मूल पाठ

नैते सृती पार्थ जानन्योगी मुह्यति कश्चन | तस्मात्सर्वेषु कालेषु योगयुक्तो भवार्जुन

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे पृथानन्दन ! इन दोनों मार्गोंको जाननेवाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता। अतः हे अर्जुन ! तू सब समयमें योगयुक्त हो जा।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे पृथानन्दन ! इन दोनों मार्गोंको जाननेवाला कोई भी योगी मोहित नहीं होता। अतः हे अर्जुन ! तू सब समयमें योगयुक्त हो जा।

English Meaning

Knowing these paths, O Arjuna, no Yogi is deluded; therefore at all times be steadfast in Yoga.

Knowing these paths, O Arjuna, no Yogi is deluded; therefore at all times be steadfast in Yoga.

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