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श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 29

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः | ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाप्यहम्

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ।

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विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

मैं सम्पूर्ण प्राणियोंमें समान हूँ। उन प्राणियोंमें न तो कोई मेरा द्वेषी है और न कोई प्रिय है। परन्तु जो भक्तिपूर्वक मेरा भजन करते हैं, वे मेरेमें हैं और मैं उनमें हूँ।

English Meaning

The same am I to all beings; to Me there is none hateful or dear; but those who worship Me with devotion are in Me and I am also in them.

The same am I to all beings; to Me there is none hateful or dear; but those who worship Me with devotion are in Me and I am also in them.

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