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श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 9

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

न च मां तानि कर्माणि निबध्नन्ति धनञ्जय | उदासीनवदासीनमसक्तं तेषु कर्मसु

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

हे धनञ्जय ! उन (सृष्टि-रचना आदि) कर्मोंमें अनासक्त और उदासीनकी तरह रहते हुए मेरेको वे कर्म नहीं बाँधते।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

हे धनञ्जय ! उन (सृष्टि-रचना आदि) कर्मोंमें अनासक्त और उदासीनकी तरह रहते हुए मेरेको वे कर्म नहीं बाँधते।

English Meaning

These acts do not bind Me, O Arjuna, sitting like one indifferent, unattached to those acts.

These acts do not bind Me, O Arjuna, sitting like one indifferent, unattached to those acts.

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