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श्रीमद्भगवद्गीता · राजविद्या राजगुह्य योग

श्लोक 10

राजविद्या राजगुह्य योग · Rajavidya Rajaguhya Yoga

मूल पाठ

मयाऽध्यक्षेण प्रकृतिः सूयते सचराचरम् | हेतुनाऽनेन कौन्तेय जगद्विपरिवर्तते

हिन्दी अर्थ

सरल भावार्थ

प्रकृति मेरी अध्यक्षतामें सम्पूर्ण चराचर जगत् को रचती है। हे कुन्तीनन्दन ! इसी हेतुसे जगत् का विविध प्रकारसे परिवर्तन होता है।

व्
विस्तृत व्याख्या

गहन भावार्थ और सन्दर्भ

प्रकृति मेरी अध्यक्षतामें सम्पूर्ण चराचर जगत् को रचती है। हे कुन्तीनन्दन ! इसी हेतुसे जगत् का विविध प्रकारसे परिवर्तन होता है।

English Meaning

Under Me as supervisor, Nature produces the moving and the unmoving; because of this, O Arjuna, the world revolves.

Under Me as supervisor, Nature produces the moving and the unmoving; because of this, O Arjuna, the world revolves.

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