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21 दिसंबर 2025

21 दिसंबर 2025 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

21 दिसंबर 2025 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
योग
वृद्धि
करण
बव
वार
रविवार
हिन्दू मास
पौष
ऋतु
हेमन्त
सूर्योदय
07:10
सूर्यास्त
17:29

21 दिसंबर 2025 के लिए प्रश्नोत्तर

रविवार को नमक क्यों नहीं देना चाहिए?

ज्योतिष के अनुसार रविवार सूर्य का दिन है और नमक सूर्य से जुड़ा है। रविवार को नमक देने से सूर्य कमजोर होता है — आत्मविश्वास में कमी और बरकत जाने की मान्यता है। यह लोक-मान्यता आधारित है।

नाना-नानी का श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी के लिए प्रतिपदा श्राद्ध विशेष माना गया है।

पड़वा श्राद्ध क्या होता है?

पड़वा श्राद्ध प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।

प्रतिपदा मातृकुल के लिए खास क्यों है?

प्रतिपदा नाना-नानी के श्राद्ध के लिए विशेष मानी गई है।

मातामह श्राद्ध क्या है?

नाना-नानी के लिए किया जाने वाला श्राद्ध मातामह श्राद्ध है।

नाना-नानी का श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी के श्राद्ध के लिए प्रतिपदा तिथि विशेष मानी गई है।

नाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो तो श्राद्ध कब करें?

नाना-नानी की मृत्यु तिथि याद न हो या किसी अन्य तिथि पर हुई हो — फिर भी श्राद्ध पितृ पक्ष की 'प्रतिपदा तिथि' को ही करें। यह प्रतिपदा का विशेष विशेषाधिकार है जो केवल मातृकुल को दिया गया है।

नवरात्रि के पहले दिन किस देवी की पूजा होती है?

नवरात्रि का पहला दिन (प्रतिपदा) = माँ शैलपुत्री को समर्पित। माता शैलपुत्री = हिमालय की पुत्री। वे मानव की आंतरिक शक्ति, दृढ़ता और प्रकृति की आदि-ऊर्जा की साक्षात् प्रतीक हैं।

2026 में चैत्र नवरात्रि कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?

2026 चैत्र नवरात्रि: 19 मार्च (गुरुवार)। सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा)। अभिजित मुहूर्त: 12:05 से 12:53। राहुकाल: 14:48 से 16:18 (वर्जित)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

कलश स्थापना सुबह किस समय करनी चाहिए?

कलश स्थापना का सर्वश्रेष्ठ समय = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। 2026 में 19 मार्च: प्रातः 06:52 से 07:43 (मीन लग्न + शुद्ध प्रतिपदा का संयोग)। 06:52 से पहले अमावस्या प्रभाव — उससे पहले न करें।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त कैसे निकालें?

मुहूर्त के नियम (निर्णयसिन्धु): प्रतिपदा तिथि की व्याप्ति अनिवार्य। सर्वश्रेष्ठ = प्रतिपदा का प्रथम एक-तिहाई भाग (प्रातःकाल)। विकल्प = अभिजित मुहूर्त (मध्याह्न)। शुभ लग्न = द्विस्वभाव (मीन, मिथुन, कन्या, धनु)।

तांत्रिक पूजा के लिए कौन सा दिन उत्तम है?

तांत्रिक पूजा के लिए शनिवार और रविवार सबसे उत्तम दिन हैं — निशिता काल (मध्यरात्रि) में पूजा करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

रविवार को तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए क्यों?

रविवार को माता तुलसी भगवान विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं, इसलिए उस दिन पत्ते तोड़ना या जल चढ़ाना उनके व्रत को खंडित करना माना जाता है। विष्णु पुराण में यह स्पष्ट वर्जित है।

सूर्य ग्रह मजबूत करने रविवार उपाय

रविवार: अर्घ्य+आदित्य हृदय+'ॐ सूं सूर्याय नमः' 108+लाल वस्त्र+गुड़/गेहूं दान+माणिक+पिता सम्मान+गायत्री।

रविवार को लाल रंग पहनने का महत्व

रविवार = लाल/केसरिया (सूर्य)। तेज, अधिकार, स्वास्थ्य, नेतृत्व। सूर्य पूजा, अर्घ्य। माणिक रत्न। ज्योतिष परंपरा।

लोहड़ी पर अग्नि पूजा कैसे करें?

लोहड़ी अग्नि पूजा: संध्या को लकड़ी-उपले अग्नि → परिक्रमा → तिल-गुड़-मूँगफली-रेवड़ी आहुति → 'आदर आये दलिद्दर जाये!' → लोहड़ी गीत ('सुंदर मुंदरिये...') → प्रसाद वितरण। नवजात/नवविवाहित विशेष। शीत विदाई, उत्तरायण स्वागत।

नवरात्रि में कलश स्थापना कब और कैसे करें?

कलश स्थापना: प्रतिपदा, शुभ मुहूर्त (भद्रा वर्जित)। विधि: जौ बोएँ → तांबे कलश में गंगाजल + सप्तमृत्तिका + पंचरत्न → स्वस्तिक-मौली → आम पत्ते + नारियल → 'ॐ आ जिघ्र कलशं...' मंत्र → देवी आवाहन → अखण्ड ज्योति। 9 दिन अचल रहे।

सूर्य ग्रह शांति पूजा कैसे करवाएं?

सूर्य शांति: प्रतिदिन ताम्बे से सूर्य अर्घ्य (सबसे सरल) → 'ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः' 7000 जप → मदार समिधा से हवन → आदित्य हृदय स्तोत्र (सर्वश्रेष्ठ) → दान (गेहूँ, गुड़, ताँबा) → रविवार व्रत → सूर्य नमस्कार।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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