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15 जनवरी 2026

15 जनवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

15 जनवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण द्वादशी
नक्षत्र
ज्येष्ठा
योग
वृद्धि
करण
तैतिल
वार
गुरुवार
हिन्दू मास
माघ
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
07:15
सूर्यास्त
17:46

15 जनवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

गुरु ग्रह मजबूत करने के गुरुवार उपाय?

विष्णु-लक्ष्मी पूजा, केला वृक्ष पूजा, 'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' 108, हल्दी/चना/पीला/पुस्तक दान, गुरुवार व्रत, पुखराज(ज्योतिषी), पीले वस्त्र। ज्ञान बांटें+दान=गुरु प्रसन्न।

हल्दी तिलक कब लगाना शुभ है

हल्दी तिलक गुरुवार को, मांगलिक कार्यों के आरंभ में, गणेश-लक्ष्मी पूजन में और विवाह-संस्कार में विशेष रूप से शुभ है। यह बृहस्पति ग्रह को बल देता है और मंगलाचरण का प्रतीक है।

गुरुवार को कौन से काम शुभ?

गुरुवार=बृहस्पति(ज्ञान/धन)। सबसे शुभ — विवाह, गृहप्रवेश, शिक्षा, पूजा, सोना खरीद, दान। सत्यनारायण कथा। कोई वर्जना नहीं।

गुरुवार को केले का दान क्यों करते हैं?

गुरुवार = बृहस्पति (गुरु) दिन। केला = पीला (गुरु का रंग) + विष्णु/बृहस्पति प्रतीक। विधि: पीले केले + 'ॐ बृहस्पतये नमः' + दान। लाभ: ज्ञान, सम्मान, संतान सुख, विवाह बाधा दूर।

द्वादशी को संन्यासी श्राद्ध क्यों?

द्वादशी विष्णु-प्रिय और यतियों के योग्य है।

यति महालय क्या होता है?

संन्यासियों का द्वादशी श्राद्ध।

संन्यासी का श्राद्ध किस दिन करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी श्राद्ध द्वादशी को।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

द्वादशी तिथि को।

संन्यासी का श्राद्ध दशमी को होता है क्या?

नहीं, संन्यासी का श्राद्ध द्वादशी को।

अष्टका श्राद्ध किन महीनों में होता है?

मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन में।

संन्यासी का श्राद्ध कब करें?

संन्यासी का श्राद्ध एकादशी या द्वादशी को होता है।

यति का श्राद्ध कब होता है?

यति (संन्यासी) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को होता है। यति और संन्यासी समानार्थी। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित तिथि है।

संन्यासी का श्राद्ध किस तिथि को करें?

संन्यासी (यति) का श्राद्ध — जिन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया था और सांसारिक बंधनों से मुक्त थे — पितृ पक्ष की 'द्वादशी' तिथि को किया जाता है। यह उनकी विशिष्ट आध्यात्मिक कोटि के लिए शास्त्र-निर्धारित विशेष तिथि है।

संन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी को क्यों किया जाता है?

संन्यासियों के श्राद्ध के लिए पितृ पक्ष की द्वादशी तिथि निर्धारित मानी गई है।

श्राद्ध द्वादशी को क्यों करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध वर्जित है, इसलिए श्राद्ध अगले दिन द्वादशी को किया जाना चाहिए।

एकादशी के दिन श्राद्ध क्यों नहीं करना चाहिए?

एकादशी श्राद्ध करने से कर्ता, पितर और पुरोहित तीनों को नरकगामी बताया गया है, इसलिए श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए।

माँ धूमावती को अलक्ष्मी या ज्येष्ठा क्यों कहते हैं?

माँ धूमावती = अलक्ष्मी (लक्ष्मी की विपरीत) और ज्येष्ठा (दुर्भाग्य की देवी)। लक्ष्मी = सौभाग्य-समृद्धि; धूमावती = दुर्भाग्य-अभाव-कुरूपता का प्रतिनिधित्व। सांसारिक मोह के त्याग का प्रतीक।

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पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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15 जनवरी 2026 — आज का पंचांग और प्रश्नोत्तर — 18 प्रश्न