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6 फरवरी 2026

6 फरवरी 2026 — आज की तिथि, पर्व और प्रश्नोत्तर

6 फरवरी 2026 का पंचांग, मुख्य पर्व और शास्त्रीय प्रश्नोत्तर — एक स्थान पर।

पंचांग

तिथि
कृष्ण पंचमी
नक्षत्र
हस्त
योग
धृति
करण
कौलव
वार
शुक्रवार
हिन्दू मास
फाल्गुन
ऋतु
शिशिर
सूर्योदय
07:06
सूर्यास्त
18:04

6 फरवरी 2026 के लिए प्रश्नोत्तर

शुक्रवार को सफेद वस्तुएं दान करने का क्या महत्व है?

शुक्रवार शुक्र ग्रह का दिन है, सफेद रंग शुक्र का कारक है। सफेद वस्तुओं (चावल, दूध, वस्त्र, मिश्री) का दान करने से शुक्र मजबूत होता है — वैवाहिक सुख, सौंदर्य और भौतिक समृद्धि बढ़ती है।

शुक्रवार को कौन से काम शुभ?

शुक्रवार=शुक्र(लक्ष्मी/सौंदर्य)। खरीदारी, वाहन, कपड़े, आभूषण, कला, गृहप्रवेश। संतोषी/लक्ष्मी पूजा। खट्टा वर्जित(व्रत)।

राम जी की पूजा का सबसे उत्तम दिन कौन सा है

राम पूजा के लिए — मंगलवार (हनुमान के साथ), रामनवमी (चैत्र शुक्ल नवमी, जन्म-दिवस) सर्वोत्तम। नित्य राम-नाम जप में कोई भी दिन उत्तम है। शनिवार को हनुमान-राम पूजन शनि-पीड़ा निवारण के लिए विशेष।

वैभव लक्ष्मी व्रत की विधि और कथा क्या है?

11/21 शुक्रवार। संध्या पूजा, कमल, घी दीपक। व्रत कथा सुनें। खीर भोग। कथा पुस्तक दूसरी को दें। कथा: निर्धन→व्रत→धन; अपमान→दरिद्रता; पुनः व्रत→सुख। लोक परंपरा।

शुक्रवार को लक्ष्मी पूजा करने का विशेष विधान क्या है?

शुक्रवार = लक्ष्मी दिन। सफेद/गुलाबी वस्त्र, कमल, कुमकुम, घी दीपक। श्री सूक्त / चालीसा + 108 जप। खीर भोग। व्रत: निराहार/फलाहार, सफेद वस्तु दान। संध्या तुलसी दीपक।

संतोषी माता व्रत कथा और पूजा विधि क्या है?

16 शुक्रवार व्रत। भोग: गुड़+चना। खट्टा सर्वथा वर्जित (खाना+खिलाना)। एक समय भोजन। व्रत कथा+आरती। उद्यापन: 8 बालकों को भोजन। कथा: छोटी बहू → माता दर्शन → व्रत → सुख-समृद्धि। पुराणों में स्पष्ट उल्लेख नहीं — लोक परंपरा आधारित।

गजाच्छाया योग क्या है?

हस्त सूर्य, मघा चन्द्र और त्रयोदशी/अमावस्या का योग।

पंचमी और चतुर्दशी श्राद्ध में क्या अंतर है?

पंचमी अविवाहित मृत्यु के लिए, चतुर्दशी अकाल मृत्यु के लिए है।

उपनयन के बाद बाल मृत्यु का श्राद्ध कब करें?

उपनयन के बाद बाल मृत्यु का श्राद्ध पंचमी को करें।

अज्ञात तिथि वाले अविवाहित का श्राद्ध कब करें?

अज्ञात तिथि वाले अविवाहित का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित बहन का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित बहन का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित भाई का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित भाई का श्राद्ध पंचमी को करें।

कुँवारी लड़की का श्राद्ध कब करें?

कुँवारी लड़की का श्राद्ध पंचमी को किया जाता है।

कुँवारे लड़के का श्राद्ध कब करें?

कुँवारे लड़के का श्राद्ध पंचमी को करें।

अविवाहित का श्राद्ध कब करें?

अविवाहित दिवंगत का श्राद्ध पंचमी को करें।

बच्चे की मृत्यु पर श्राद्ध कब करें?

अविवाहित या बाल्यावस्था में मृत बच्चों का श्राद्ध शास्त्रों के अनुसार पंचमी (भरणी पंचमी) या त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। दोनों तिथियाँ शास्त्रों में निर्धारित हैं और कुलाचार के अनुसार इनमें से किसी एक का चयन किया जा सकता है। यह विशेष कोटि के मृतकों के लिए है।

कमला देवी की पूजा कब और कैसे करते हैं?

कमला पूजा का समय: प्रत्येक शुक्रवार + दीपावली अमावस्या। धनतेरस से दीपावली तक लक्ष्मी-कुबेर पूजन। ब्रह्म मुहूर्त = शुभ समय।

माँ त्रिपुर सुंदरी की साधना कब करनी चाहिए?

माँ त्रिपुर सुंदरी साधना का शुभ काल: शुक्रवार = विशेष शुभ। गुप्त नवरात्रि और पूर्णिमा भी उपयुक्त। अन्य शुभ तिथियों पर भी साधना की जा सकती है।

सभी पर्व
पर्व-पञ्चांग

होली, दिवाली, नवरात्रि, एकादशी, पूर्णिमा — सभी पर्व।

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6 फरवरी 2026 — आज का पंचांग और प्रश्नोत्तर — 18 प्रश्न