विस्तृत उत्तर
जब सूर्य हस्त नक्षत्र में, चन्द्रमा मघा नक्षत्र में और तिथि त्रयोदशी या अमावस्या हो, तब गजाच्छाया योग बनता है।
गजाच्छाया योग क्या है को संदर्भ सहित समझें
गजाच्छाया योग क्या है का सबसे सीधा सार यह है: हस्त सूर्य, मघा चन्द्र और त्रयोदशी/अमावस्या का योग।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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मघा नक्षत्र पितरों से कैसे जुड़ा है?
मघा नक्षत्र के देवता पितर हैं।
भुवर्लोक किस तत्व से बना है?
भुवर्लोक मुख्य रूप से वायु-तत्व और आकाश-तत्व से बना है। यहाँ पृथ्वी-तत्व और जल-तत्व का अभाव है, केवल वायु और मेघ (जल वाष्प) हैं।
भुवर्लोक में कौन-कौन सी सत्ताएं रहती हैं?
भुवर्लोक में ऊपरी भाग में सिद्ध, चारण और विद्याधर रहते हैं जबकि निचले भाग में यक्ष, राक्षस, भूत, प्रेत और पिशाच विचरण करते हैं।
पुण्यात्मा के लिए भुवर्लोक कैसा होता है?
पुण्यात्माओं के लिए भुवर्लोक एक पारदर्शी सुगम मार्ग है। वे इससे होकर आसानी से स्वर्लोक या पितृलोक पहुँच जाते हैं बिना यहाँ फंसे।
सिद्धगण बिना विमान के कैसे यात्रा करते हैं?
सिद्धगण अपनी जन्मजात योग-शक्ति और अंतर्धान विद्या से बिना विमान के अंतरिक्ष में विचरण करते हैं। उनकी अष्ट-सिद्धियाँ उन्हें यह शक्ति देती हैं।
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