सूर्य देव बीज बीज मंत्र
ह्रीं
जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता और आलस्य का नाश, तथा आत्मविश्वास में प्रचंड वृद्धि 61।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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यह मंत्र क्यों?
जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता और आलस्य का नाश, तथा आत्मविश्वास में प्रचंड वृद्धि 61।
इस मंत्र से क्या होगा?
जीवन से हर प्रकार की नकारात्मकता और आलस्य का नाश, तथा आत्मविश्वास में प्रचंड वृद्धि
जाप विधि
प्रातः काल सूर्योदय के समय जप करें 61।
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क्रीं कालिकायै स्वाहा मम नाभिं सदावतु ॥ ह्रीं कालिकायै स्वाहा मम पृष्ठं सदावतु । रक्तबीजविनाशिन्यै स्वाहा हस्तौ सदावतु ॥ नीलुत्वल दलश्यामा शत्रु संघ विदारणी नरमुंड तथा खगम कमलम च वरम तथा निर्भयाम रक्त बदनाम दस्ताली घोर रूपणी शवासनताम काली मुंडमाला विभूषिताम सर्वाङ्गं पातु मे देवी सर्व संपत् करे शुभे सर्व देव स्तु ते देवी कालिके तवाम नमाम यहम 23
jap mantraॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
dhyan mantraध्यायेन्नित्यं महेशं रजतगिरिनिभं चारुचंद्रावतंसं रत्नाकल्पोज्ज्वलांगं परशुमृगवराभीतिहस्तं प्रसन्नम्। पद्मासीनं समंतात्स्थितममरगणैर्व्याघ्रकृत्तिं वसानं विश्वाद्यं विश्वबीजं निखिलभयहरं पंचवक्त्रं त्रिनेत्रम्॥
ugra mantraॐ क्रीं हूं क्रीं सर्व शत्रु स्तंभिनी घोर कालिकायै फट्
shanti mantraॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु । सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु । सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
stotra mantraसर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥ 29